सनातन ज्ञान
हिंदू धर्म · ज्ञान संसार
🔍 खोजेंनित्य कर्मचार वेदवेद18 महापुराण + 18 उपपुराणपुराणउपनिषद24 अवतारऋषि-मुनि ज्ञानकोशदेव-देवी ज्ञानकोशश्रीराम कथाश्रीकृष्ण कथाचार धामज्योतिर्लिंग52 शक्तिपीठशास्त्र पुस्तकालयग्रंथ संसारइतिहासमंत्रमंत्र एवं स्तुतियाँपाठ — सुंदरकांड आदिश्रवणपूजा विधिपर्व-त्योहार16 संस्कारपरंपराअखाड़े व सम्प्रदायपवित्र नदियाँपवित्र वृक्षगोत्र-प्रवरसमाधान (100 प्रश्नोत्तर)सनातन संवाद🔍 खोजेंनित्य कर्मचार वेदवेद18 महापुराण + 18 उपपुराणपुराणउपनिषद24 अवतारऋषि-मुनि ज्ञानकोशदेव-देवी ज्ञानकोशश्रीराम कथाश्रीकृष्ण कथाचार धामज्योतिर्लिंग52 शक्तिपीठशास्त्र पुस्तकालयग्रंथ संसारइतिहासमंत्रमंत्र एवं स्तुतियाँपाठ — सुंदरकांड आदिश्रवणपूजा विधिपर्व-त्योहार16 संस्कारपरंपराअखाड़े व सम्प्रदायपवित्र नदियाँपवित्र वृक्षगोत्र-प्रवरसमाधान (100 प्रश्नोत्तर)सनातन संवाद
मंत्र एवं स्तुतियाँ

देवी आरती — अम्बे तू है जगदम्बे काली

देवी दुर्गा · आरती

स्रोत सत्यापन लंबितदेवी दुर्गाआरती

पूर्ण मूल पाठ सत्यापन लंबित — शीघ्र जोड़ा जाएगा।

📖 भावार्थ

माता की प्रचलित आरती; पूर्ण मूल पाठ सत्यापन के पश्चात जोड़ा जाएगा।

इस रचना का पूर्ण मूल पाठ शास्त्रीय सत्यापन के पश्चात जोड़ा जाएगा — तब तक कोई अप्रमाणित पाठ प्रकाशित नहीं किया गया है।

🪔 पाठ-पूर्व ध्यान रखने योग्य बातें

  • स्वच्छ स्थान और स्वच्छ शरीर — यथासंभव स्नान के पश्चात पाठ करें।
  • शांत मन — कुछ क्षण गहरी श्वास लेकर मन स्थिर करें।
  • श्रद्धा और सम्मान — शब्दों को धीरे, स्पष्ट और भावपूर्वक बोलें।
  • अर्थ समझकर पाठ करना अधिक फलदायी माना गया है — भावार्थ अवश्य पढ़ें।

कौन पढ़ सकता है?

यह पाठ श्रद्धा रखने वाला कोई भी व्यक्ति कर सकता है — स्वच्छता, शांत मन और सम्मानपूर्ण उच्चारण ही मुख्य नियम हैं। विशेष साधना-विधियाँ (बीजमंत्र, दीक्षा, अनुष्ठान) योग्य गुरु-परंपरा से सीखें।

🔗 संबंधित मंत्र-स्तुतियाँ

🪔 महत्त्व व परिचय

"अम्बे तू है जगदम्बे काली" भारत की सबसे लोकप्रिय देवी-आरतियों में से एक है, जो देवी को "जगत की माता" के रूप में स्मरण करती है। यह आरती नवरात्रि और नियमित देवी-पूजा में व्यापक श्रद्धा से गाई जाती है — देवी को शक्ति, करुणा और रक्षा की अधिष्ठात्री माना जाता है, और यह आरती उनके काली, दुर्गा, अंबा जैसे विविध स्वरूपों का एक साथ स्मरण करती है।

🕰️ कब और कैसे

इस परंपरा के अनुसार यह आरती संध्या-पूजा में, विशेषकर नवरात्रि के नौ दिनों में, दीपक जलाकर गाई जाती है। मंदिर में सामूहिक आरती के साथ-साथ घर पर भी परिवार सहित गाई जाती है।

🙏 आध्यात्मिक भाव

आरती का भाव है मातृ-शक्ति के प्रति कृतज्ञता — देवी को माता के रूप में स्मरण कर करुणा, सुरक्षा और शक्ति की भावना को हृदय में जगाना।

प्रश्नोत्तर

क्या यह आरती केवल नवरात्रि में ही गाई जाती है?

नहीं, यह नियमित देवी-पूजा का भी हिस्सा है; नवरात्रि में विशेष श्रद्धा से गाई जाती है।

क्या इस आरती में देवी के कई नाम आते हैं?

हाँ, यह देवी के विविध स्वरूपों (काली, अंबा, दुर्गा आदि) को एक साथ स्मरण करती है।

क्या घर पर बिना पंडित के आरती की जा सकती है?

हाँ, परिवार स्वयं श्रद्धापूर्वक आरती कर सकता है, पुरोहित आवश्यक नहीं।

🔗 संबंधित पृष्ठ