अथर्ववेद
अथर्ववेदः
चौथा वेद, लोक कल्याण और व्यावहारिक ज्ञान का वेद
पढ़ने का समय
240 मिनट
श्लोक/आयत
5987
अध्याय/भाग
20
काल अनुमान
ईसा पूर्व 1000-800
लेखक
अथर्वा और अंगिरा ऋषि
स्रोत
वैदिक परंपरा
अथर्ववेदः
चौथा वेद, लोक कल्याण और व्यावहारिक ज्ञान का वेद
पढ़ने का समय
240 मिनट
श्लोक/आयत
5987
अध्याय/भाग
20
काल अनुमान
ईसा पूर्व 1000-800
लेखक
अथर्वा और अंगिरा ऋषि
स्रोत
वैदिक परंपरा
अथर्ववेद अन्य तीन वेदों से कुछ भिन्न स्वभाव का है — यह मुख्यतः यज्ञ-केंद्रित न होकर दैनिक जीवन, आरोग्य, गृहस्थ-जीवन, राजधर्म और औषधि-ज्ञान से जुड़े मंत्रों का संग्रह है। इसकी बीस काण्डों में विभाजित संहिता में लोक-जीवन और ब्रह्मविद्या — दोनों की सामग्री साथ-साथ मिलती है। अथर्ववेद की प्रमुख शाखा शौनकीय है, जबकि पैप्पलाद शाखा आंशिक रूप से उपलब्ध है। यज्ञ की परंपरागत व्यवस्था में अथर्ववेद से जुड़ा पुरोहित 'ब्रह्मा' कहलाता है, जो चारों वेदों का ज्ञाता होकर संपूर्ण यज्ञ-विधि का पर्यवेक्षण करता है। अथर्ववेद से जुड़ा ब्राह्मण ग्रंथ गोपथ ब्राह्मण है, जबकि उपनिषद-परंपरा में मुण्डक, माण्डूक्य और प्रश्न उपनिषद इसी से जुड़े हैं — मुण्डक उपनिषद से प्रसिद्ध वाक्य 'सत्यमेव जयते' आया है। अथर्ववेद के प्रमुख सूक्तों में भूमि सूक्त (पृथ्वी की स्तुति, पर्यावरण-चेतना का प्रारंभिक उदाहरण), काल सूक्त और सांमनस्य सूक्त (सामाजिक सौहार्द) प्रमुख हैं। इस वेद की केंद्रीय शिक्षा है — लोक-मंगल और ब्रह्म-जिज्ञासा का साथ-साथ चलना। वर्तमान समय में अथर्ववेद का महत्व 'सत्यमेव जयते' जैसे राष्ट्रीय आदर्श-वाक्य, भूमि-वंदना की दृष्टि और परिवार-सौहार्द की शिक्षा के रूप में देखा जाता है।
🕉️ अथर्ववेद की पूरी संरचना, शाखाएँ, ऋषि-परंपरा और मूल संहिता-पाठ के विस्तृत अध्ययन के लिए समर्पित खंड देखें।
विस्तार से पढ़ें →अन्य तीन वेद मुख्यतः यज्ञ-केंद्रित हैं, जबकि अथर्ववेद दैनिक जीवन, आरोग्य, गृहस्थ-जीवन और लोक-कल्याण से जुड़े मंत्रों पर अधिक केंद्रित है।
यह वाक्य मुण्डक उपनिषद से है, जो अथर्ववेद-परंपरा से जुड़ा उपनिषद है।
ब्रह्मा पुरोहित चारों वेदों का ज्ञाता माना जाता है और यज्ञ की संपूर्ण विधि की निगरानी व त्रुटि-सुधार का कार्य करता है।
भूमि सूक्त पृथ्वी की महिमा और उसके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने वाला अथर्ववेद का प्रसिद्ध सूक्त है।