सर्वे भवन्तु सुखिनः
गुरु/शांति · शांति मंत्र
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्॥
📖 भावार्थ
सभी सुखी हों, सभी स्वस्थ रहें, सभी कल्याण का अनुभव करें और किसी को दुःख न प्राप्त हो।
📜 स्रोत
प्रचलित मंगलकामना-श्लोक परंपरा
🪔 पाठ-पूर्व ध्यान रखने योग्य बातें
- ✦स्वच्छ स्थान और स्वच्छ शरीर — यथासंभव स्नान के पश्चात पाठ करें।
- ✦शांत मन — कुछ क्षण गहरी श्वास लेकर मन स्थिर करें।
- ✦श्रद्धा और सम्मान — शब्दों को धीरे, स्पष्ट और भावपूर्वक बोलें।
- ✦अर्थ समझकर पाठ करना अधिक फलदायी माना गया है — भावार्थ अवश्य पढ़ें।
कौन पढ़ सकता है?
यह पाठ श्रद्धा रखने वाला कोई भी व्यक्ति कर सकता है — स्वच्छता, शांत मन और सम्मानपूर्ण उच्चारण ही मुख्य नियम हैं। विशेष साधना-विधियाँ (बीजमंत्र, दीक्षा, अनुष्ठान) योग्य गुरु-परंपरा से सीखें।
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🪔 महत्त्व व परिचय
"सर्वे भवन्तु सुखिनः" एक शांति मंत्र है जो संपूर्ण सृष्टि — सभी प्राणियों — के लिए सुख, स्वास्थ्य, कल्याण और शांति की कामना करता है। यह भारतीय परंपरा की सार्वभौमिक शुभकामना-भावना का सर्वोत्तम उदाहरण है — यह किसी एक व्यक्ति, समुदाय या धर्म तक सीमित प्रार्थना नहीं, बल्कि संपूर्ण जगत के कल्याण की कामना है।
🕰️ कब और कैसे
इस परंपरा के अनुसार यह मंत्र किसी भी पूजा, यज्ञ, सभा या शांति-पाठ के समापन पर पढ़ा जाता है। इसे व्यक्तिगत प्रार्थना के रूप में भी, दिन में किसी भी समय शांत मन से पढ़ा जा सकता है।
🙏 आध्यात्मिक भाव
इसका भाव है संकीर्ण स्वार्थ से ऊपर उठकर सार्वभौमिक कल्याण की कामना करना — "मेरा भला" से आगे बढ़कर "सबका भला" सोचने की व्यापक दृष्टि।
❓ प्रश्नोत्तर
क्या यह मंत्र किसी विशेष धर्म तक सीमित है?
नहीं, इसका भाव सार्वभौमिक है — यह सभी प्राणियों के कल्याण की कामना करता है।
क्या इसे किसी भी अवसर पर पढ़ा जा सकता है?
हाँ, यह किसी भी शुभ अवसर, सभा या व्यक्तिगत प्रार्थना में उपयुक्त है।
क्या यह मंत्र लंबा है?
नहीं, यह अपेक्षाकृत संक्षिप्त और स्मरण-योग्य शांति-प्रार्थना है।