सनातन ज्ञान
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मंत्र एवं स्तुतियाँ

गोविन्द दामोदर स्तोत्र

श्रीकृष्ण · स्तोत्र

आचार्य-रचित स्तोत्रश्रीकृष्णस्तोत्र

अग्रे कुरूनाम् अथ पाण्डवानां दुःशासनेनाहृत वस्त्रकेशा । कृष्णा तदाक्रोशदनन्यनाथ गोविंद दामोदर माधवेति ॥ १ ॥ अग्रे कुरूनाम् अथ पाण्डवानां दुःशासनेनाहृत वस्त्रकेशा । कृष्णा तदाक्रोशदनन्यनाथ गोविंद दामोदर माधवेति ॥ २ ॥ श्रीकृष्ण विष्णो मधुकैटभारे भक्तानुकम्पिन् भगवन् मुरारे । त्रायस्व माम् केशव लोकनाथ गोविंद दामोदर माधवेति ॥ ३ ॥ श्रीकृष्ण विष्णो मधुकैटभारे भक्तानुकम्पिन् भगवन् मुरारे । त्रायस्व माम् केशव लोकनाथ गोविंद दामोदर माधवेति ॥ ४ ॥ विक्रेतुकाम अखिल गोपकन्या मुरारी पदार्पित चित्तवृत्त्यः । दध्योदकं मोहवसादवोचद् गोविंद दामोदर माधवेति ॥ ५ ॥ विक्रेतुकाम अखिल गोपकन्या मुरारी पदार्पित चित्तवृत्त्यः । दध्योदकं मोहवसादवोचद् गोविंद दामोदर माधवेति ॥ ६ ॥ जगधोय दत्तो नवनीत पिण्डः गृहे यशोदा विचिकित्सयानि । उवाच सत्यं वद हे मुरारे गोविंद दामोदर माधवेति ॥ ७ ॥ जगधोय दत्तो नवनीत पिण्डः गृहे यशोदा विचिकित्सयानि । उवाच सत्यं वद हे मुरारे गोविंद दामोदर माधवेति ॥ ८ ॥ जिह्वे रसाग्रे मधुरा प्रिया त्वं सत्यं हितं त्वं परमं वदामि । अवर्णयेत मधुराक्षराणि गोविंद दामोदर माधवेति ॥ ९ ॥ जिह्वे रसाग्रे मधुरा प्रिया त्वं सत्यं हितं त्वं परमं वदामि । अवर्णयेत मधुराक्षराणि गोविंद दामोदर माधवेति ॥ १० ॥ गोविंद गोविंद हरे मुरारे गोविंद गोविंद मुकुंद कृष्ण । गोविंद गोविंद रथांगपाणे गोविंद दामोदर माधवेति ॥ ११ ॥ गोविंद गोविंद हरे मुरारे गोविंद गोविंद मुकुंद कृष्ण । गोविंद गोविंद रथांगपाणे गोविंद दामोदर माधवेति ॥ १२ ॥ सुखावसाने त्विदमेव सारं दुःखावसाने त्विदमेव गेयम् । देहावसाने त्विदमेव जप्यं गोविंद दामोदर माधवेति ॥ १३ ॥ सुखावसाने त्विदमेव सारं दुःखावसाने त्विदमेव गेयम् । देहावसाने त्विदमेव जप्यं गोविंद दामोदर माधवेति ॥ १४ ॥ वक्तुं समर्थोपि नवक्ति कश्चित् अहो जनानां व्यसनाभिमुख्यम् । जिह्वे पिबस्वमृतमेतदेव गोविंद दामोदर माधवेति ॥ १५ ॥ वक्तुं समर्थोपि न वक्ति कश्चित् अहो जनानां व्यसनाभिमुख्यम् । जिह्वे पिबस्वमृतमेतदेव गोविंद दामोदर माधवेति ॥ १६ ॥

📖 भावार्थ

बिल्वमंगल (लीलाशुक)-परंपरा में प्रसिद्ध "गोविन्द दामोदर माधवेति" नाम-स्मरण स्तोत्र

📜 स्रोत

मूल पाठ स्रोत: संस्कृत विकिस्रोत (sa.wikisource.org), CC BY-SA 4.0 — पाठ अपरिवर्तित लिया गया

🪔 पाठ-पूर्व ध्यान रखने योग्य बातें

  • स्वच्छ स्थान और स्वच्छ शरीर — यथासंभव स्नान के पश्चात पाठ करें।
  • शांत मन — कुछ क्षण गहरी श्वास लेकर मन स्थिर करें।
  • श्रद्धा और सम्मान — शब्दों को धीरे, स्पष्ट और भावपूर्वक बोलें।
  • अर्थ समझकर पाठ करना अधिक फलदायी माना गया है — भावार्थ अवश्य पढ़ें।

कौन पढ़ सकता है?

यह पाठ श्रद्धा रखने वाला कोई भी व्यक्ति कर सकता है — स्वच्छता, शांत मन और सम्मानपूर्ण उच्चारण ही मुख्य नियम हैं। विशेष साधना-विधियाँ (बीजमंत्र, दीक्षा, अनुष्ठान) योग्य गुरु-परंपरा से सीखें।

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