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योग सूत्र

योग और मन की विज्ञान

पढ़ने का समय

25 मिनट

सूत्र

196

पाद

4

कर्ता

पतंजलि

एक मिनट में समझें

योग सूत्र पतंजलि द्वारा लिखा गया एक प्राचीन ग्रंथ है जो योग और मन के बारे में है। इसमें 196 सूत्र (छोटे कथन) हैं जो 4 भागों में विभाजित हैं। योग सिर्फ शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि एक आध्यात्मिक विज्ञान है जो मन को शांत करता है और आत्मज्ञान की ओर ले जाता है।

मुख्य विषय:

  • ✓ योग की परिभाषा और उद्देश्य
  • ✓ मन की प्रकृति को समझना
  • ✓ ध्यान और समाधि के मार्ग
  • ✓ आठ अंगों की योग साधना
ग्रंथ आधारितविद्वान द्वारा सत्यापितअनुवाद सत्यापित

📖 परिचय — योगसूत्र

योगसूत्र महर्षि पतंजलि द्वारा रचित योग दर्शन का मूल आधार-ग्रंथ है, जो चार पादों — समाधिपाद, साधनपाद, विभूतिपाद और कैवल्यपाद — में लगभग 195-196 सूत्रों में विभाजित है। इसका दूसरा ही सूत्र, 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः', पूरे शास्त्र की परिभाषा दे देता है — चित्त की वृत्तियों का निरोध ही योग है। योगसूत्र सांख्य दर्शन की पुरुष-प्रकृति तत्व-योजना को आधार मानता है, पर उसमें दो नई बातें जोड़ता है — ईश्वर-प्रणिधान (ईश्वर के प्रति समर्पण) और अष्टांग योग का एक व्यवस्थित, चरणबद्ध साधना-क्रम (यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि)। व्यास का भाष्य योगसूत्र की सबसे प्राचीन और प्रामाणिक व्याख्या मानी जाती है। आधुनिक विश्व में लोकप्रिय आसन-केंद्रित योग इस व्यापक शास्त्र के आठ अंगों में से एक अंग मात्र है — पातंजल योग का मूल लक्ष्य चित्त-शुद्धि, ध्यान और अंततः कैवल्य (पुरुष की स्वरूप-प्रतिष्ठा) है।

🔑 मुख्य बातें

  • योगसूत्र पतंजलि रचित है और चार पादों में लगभग 195-196 सूत्रों में विभाजित है।
  • "योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः" — चित्त की वृत्तियों का निरोध ही योग है — यह इसकी मूल परिभाषा है।
  • अष्टांग योग (यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि) इसकी व्यवस्थित साधना-पद्धति है।
  • यह सांख्य दर्शन की तत्व-योजना अपनाकर उसमें ईश्वर-प्रणिधान जोड़ता है।
  • व्यास का भाष्य योगसूत्र की सबसे प्राचीन और प्रामाणिक व्याख्या मानी जाती है।

🧘 योग दर्शन का पूरा परिचय — अष्टांग मार्ग और मूल अवधारणाओं सहित — देखें।

विस्तार से पढ़ें →

❓ प्रश्नोत्तर

योगसूत्र की परिभाषा के अनुसार योग क्या है?

"योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः" — अर्थात चित्त की वृत्तियों (विचार-तरंगों) का निरोध (शांत होना) ही योग है।

क्या योगसूत्र केवल आसन (व्यायाम) पर केंद्रित है?

नहीं, आसन अष्टांग मार्ग के आठ अंगों में से केवल एक है; योगसूत्र का मुख्य विषय चित्त-शुद्धि, ध्यान और कैवल्य है।

योग और सांख्य दर्शन में क्या संबंध है?

योग सांख्य की पुरुष-प्रकृति तत्व-योजना स्वीकार करता है और उसमें ईश्वर-प्रणिधान तथा व्यवस्थित साधना-क्रम जोड़ता है।

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