शिव पुराण
शिवपुराणम्
शिव की परम शक्ति और ध्यान का महान् ग्रंथ
पढ़ने का समय
24 मिनट
श्लोक/आयत
24000
अध्याय/भाग
7
काल अनुमान
ईसा सन् 500-900
लेखक
महर्षि व्यास
स्रोत
महापुराण
शिवपुराणम्
शिव की परम शक्ति और ध्यान का महान् ग्रंथ
पढ़ने का समय
24 मिनट
श्लोक/आयत
24000
अध्याय/भाग
7
काल अनुमान
ईसा सन् 500-900
लेखक
महर्षि व्यास
स्रोत
महापुराण
शिव पुराण शैव परंपरा का प्रमुख महापुराण है, जिसमें शिव की महिमा, उनके विविध स्वरूपों और लीलाओं का विस्तृत वर्णन मिलता है। इसका एक महत्वपूर्ण भाग द्वादश ज्योतिर्लिंगों से जुड़ी कथाओं को समर्पित है, जो भारत भर में फैले प्रमुख शिव-तीर्थों की उत्पत्ति और महिमा बताती हैं। रुद्र-संहिता जैसे खंडों में शिव के विभिन्न रूपों (जैसे सृष्टि, सती, पार्वती, कुमार, युद्ध खंड) का क्रमबद्ध वर्णन है। एक महत्वपूर्ण और ईमानदारी से बताने योग्य तथ्य यह है कि अठारह महापुराणों की परंपरागत सूची में एक प्रसिद्ध गणना-भेद है — कुछ प्राचीन सूचियाँ वायु पुराण को अठारह में गिनती हैं तो कुछ शिव पुराण को; दोनों ग्रंथ आज स्वतंत्र रूप से उपलब्ध हैं और परस्पर घनिष्ठ परंपरा-संबंध रखते हैं। यह भेद पुराण-परंपरा की कमी नहीं, उसके जीवंत और विकासशील स्वभाव का प्रमाण माना जाता है। शिव पुराण की कथाएँ आज भी शिव-भक्ति, कांवड़-यात्रा और ज्योतिर्लिंग-दर्शन की परंपरा से गहराई से जुड़ी हैं।
📚 शिव पुराण का विस्तृत अध्ययन-पृष्ठ और मूल ग्रंथ-खंड देखें।
विस्तार से पढ़ें →अठारह महापुराणों की कुछ प्राचीन सूचियाँ वायु पुराण को गिनती हैं तो कुछ शिव पुराण को; यह एक सुपरिचित परंपरा-भेद है, दोनों ग्रंथ आज स्वतंत्र रूप से उपलब्ध हैं और इसे विवाद के बजाय परंपरा की जीवंतता का प्रमाण माना जाता है।
ये भारत भर में स्थित शिव के बारह प्रमुख तीर्थ-स्वरूप हैं, जिनकी उत्पत्ति-कथाएँ शिव पुराण में विस्तार से वर्णित हैं।
यह शैव परंपरा का प्रमुख ग्रंथ है, पर इसकी दार्शनिक और सांस्कृतिक सामग्री व्यापक अध्ययन-रुचि की भी विषय-वस्तु है।