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मंत्र एवं स्तुतियाँ

विष्णु अष्टोत्तरशतनाम

विष्णु · नामावली

स्रोत सत्यापन लंबितविष्णुनामावली

पूर्ण मूल पाठ सत्यापन लंबित — शीघ्र जोड़ा जाएगा।

📖 भावार्थ

भगवान विष्णु के १०८ नामों की नामावली; पूर्ण मूल पाठ सत्यापन के पश्चात जोड़ा जाएगा।

इस रचना का पूर्ण मूल पाठ शास्त्रीय सत्यापन के पश्चात जोड़ा जाएगा — तब तक कोई अप्रमाणित पाठ प्रकाशित नहीं किया गया है।

🪔 पाठ-पूर्व ध्यान रखने योग्य बातें

  • स्वच्छ स्थान और स्वच्छ शरीर — यथासंभव स्नान के पश्चात पाठ करें।
  • शांत मन — कुछ क्षण गहरी श्वास लेकर मन स्थिर करें।
  • श्रद्धा और सम्मान — शब्दों को धीरे, स्पष्ट और भावपूर्वक बोलें।
  • अर्थ समझकर पाठ करना अधिक फलदायी माना गया है — भावार्थ अवश्य पढ़ें।

कौन पढ़ सकता है?

यह पाठ श्रद्धा रखने वाला कोई भी व्यक्ति कर सकता है — स्वच्छता, शांत मन और सम्मानपूर्ण उच्चारण ही मुख्य नियम हैं। विशेष साधना-विधियाँ (बीजमंत्र, दीक्षा, अनुष्ठान) योग्य गुरु-परंपरा से सीखें।

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🪔 महत्त्व व परिचय

अष्टोत्तरशतनाम अर्थात "108 नाम" — भारतीय परंपरा में 108 की संख्या को शुभ और पूर्णता का प्रतीक माना जाता है (जैसे माला में 108 मनके)। विष्णु अष्टोत्तरशतनाम विष्णुजी के 108 नामों का संकलन है, जो सहस्रनाम (1000 नाम) की तुलना में संक्षिप्त किंतु फिर भी विष्णुजी के विविध गुणों और स्वरूपों को समेटने वाली रचना मानी जाती है।

🕰️ कब और कैसे

इस परंपरा के अनुसार 108-नाम पाठ प्रायः माला के साथ, प्रत्येक नाम पर एक मनका फेरते हुए किया जाता है — यह विशेषकर एकादशी और विष्णु-पूजा में प्रचलित है। समय अभाव में भी यह सहस्रनाम से छोटा होने के कारण अपेक्षाकृत सुगम माना जाता है।

🙏 आध्यात्मिक भाव

इसका भाव है विविधता में एकता का बोध — 108 भिन्न नाम एक ही परमात्मा के अनेक गुणों और रूपों की ओर संकेत करते हैं।

प्रश्नोत्तर

108 नाम ही क्यों चुने गए?

भारतीय परंपरा में 108 अंक को विशेष शुभ माना गया है; यह माला-परंपरा से भी जुड़ा है।

क्या यह विष्णु सहस्रनाम से अलग है?

हाँ, यह संक्षिप्त 108-नाम संकलन है, सहस्रनाम में 1000 नाम होते हैं।

क्या माला के बिना भी पाठ किया जा सकता है?

हाँ, माला सहायक साधन है, अनिवार्य नहीं।

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