दशावतार स्तोत्र
विष्णु · स्तोत्र
नमोऽस्तु नारायणमन्दिराय नमोऽस्तु हारायणकन्धराय । नमोऽस्तु पारायणचर्चिताय नमोऽस्तु नारायण् तेऽर्चिताय ॥ १॥ नमोऽस्तु मत्स्याय लयाब्धिगाय नमोऽस्तु कूर्माय पयोब्धिगाय । नमो वराहाय धराधराय नमो नृसिंहाय परात्पराय ॥ २॥ नमोऽस्तु शक्राश्रयवामनाय नमोऽस्तु विप्रोत्सवभार्गवाय । नमोऽस्तु सीताहितराघवाय नमोऽस्तु पार्थस्तुतयादवाय ॥ ३॥ नमोऽस्तु बुद्धाय विमोहकाय नमोऽस्तु ते कल्किपयोदिताय । नमोऽस्तु पूर्णामितसद्गुणाय समस्तनाथाय हयाननाय ॥ ४॥ करस्थशङ्खोल्लसदक्षमालाप्रबोधमुद्राभयपुस्तकाय । नमोऽस्तु वक्त्रोद्गिरदागमाय निरस्त हेयाय हयाननाय ॥ ५॥ रमासमाकारचतुष्टयेन क्रमाच्चतुर्दिक्षु निषेविताय । नमोऽस्तु पार्श्वद्वयगद्विरूपश्रियाभिषिक्ताय हयाननाय ॥ ६॥ किरीटपट्टाङ्गदहारकाञ्चीसुरत्नपीतांबरनूपुराद्यैः । विराजिताङ्गाय नमोऽस्तु तुभ्यं सुरैः परीताय हयाननाय ॥ ७॥ विमुक्तवन्द्याय नमोऽस्तु विश्वग्विधूतविघ्नाय हयाननाय । नमोऽस्तु शिष्टेष्टद वादिराजकृताष्टकाभिष्टुतचेष्टिताय ॥ ८॥ नमोऽस्तु शिष्टेष्टद वादिराजकृताष्टकाभिष्टुतचेष्टिताय । दसावतारैस्त्रिदसार्थदाय निशेशबिंबस्थ हयाननाय ॥ ९॥ ॥ इति वादिराजपूज्यचरणविरचितं दशावतारस्तोत्रं संपूर्णम् ॥
📖 भावार्थ
कवि जयदेव-परंपरा (गीतगोविन्द) में प्रसिद्ध, भगवान के दस अवतारों की स्तुति
📜 स्रोत
मूल पाठ स्रोत: संस्कृत विकिस्रोत (sa.wikisource.org), CC BY-SA 4.0 — पाठ अपरिवर्तित लिया गया
🪔 पाठ-पूर्व ध्यान रखने योग्य बातें
- ✦स्वच्छ स्थान और स्वच्छ शरीर — यथासंभव स्नान के पश्चात पाठ करें।
- ✦शांत मन — कुछ क्षण गहरी श्वास लेकर मन स्थिर करें।
- ✦श्रद्धा और सम्मान — शब्दों को धीरे, स्पष्ट और भावपूर्वक बोलें।
- ✦अर्थ समझकर पाठ करना अधिक फलदायी माना गया है — भावार्थ अवश्य पढ़ें।
कौन पढ़ सकता है?
यह पाठ श्रद्धा रखने वाला कोई भी व्यक्ति कर सकता है — स्वच्छता, शांत मन और सम्मानपूर्ण उच्चारण ही मुख्य नियम हैं। विशेष साधना-विधियाँ (बीजमंत्र, दीक्षा, अनुष्ठान) योग्य गुरु-परंपरा से सीखें।
🔗 संबंधित मंत्र-स्तुतियाँ
🪔 महत्त्व व परिचय
दशावतार स्तोत्र विष्णुजी के दस प्रमुख अवतारों (मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध/बलराम, कल्कि) की स्तुति करने वाली आचार्य-रचित रचना है, जिसे परंपरा में जयदेव कवि से जोड़ा जाता है (गीतगोविंद के दशावतार-स्तोत्र की परंपरा)। यह रचना विष्णुजी के पालन-धर्म को विभिन्न युगों में विभिन्न रूपों में प्रकट होने के भाव को काव्यात्मक ढंग से प्रस्तुत करती है।
🕰️ कब और कैसे
इस परंपरा के अनुसार दशावतार स्तोत्र प्रातः पूजा में या विष्णु-संबंधी पर्वों पर श्रद्धापूर्वक पढ़ा जाता है। प्रत्येक अवतार का स्मरण करते हुए पढ़ना इसे विशेष रूप से भावपूर्ण बनाता है।
🙏 आध्यात्मिक भाव
इसका भाव है समय-समय पर धर्म की रक्षा का स्मरण — विभिन्न अवतारों की कथा से यह सीख कि परमात्मा हर युग की आवश्यकता के अनुसार सहायता के लिए प्रकट होते हैं।
❓ प्रश्नोत्तर
दशावतार स्तोत्र किसने रचा?
परंपरा में इसे कवि जयदेव की गीतगोविंद-परंपरा से जोड़ा जाता है।
दस अवतारों की सूची में मतभेद क्यों है?
कुछ परंपराएँ नौवें अवतार के रूप में बुद्ध गिनती हैं, कुछ बलराम — दोनों धाराएँ अपनी-अपनी परंपरा में मान्य हैं।
क्या 24 अवतारों की सूची भी है?
हाँ, श्रीमद्भागवत-परंपरा में विस्तृत 24-अवतार सूची भी मिलती है, विवरण के लिए विष्णु-अवतार खंड देखें।