सनातन ज्ञान
हिंदू धर्म · ज्ञान संसार
🔍 खोजेंनित्य कर्मचार वेदवेद18 महापुराण + 18 उपपुराणपुराणउपनिषद24 अवतारऋषि-मुनि ज्ञानकोशदेव-देवी ज्ञानकोशश्रीराम कथाश्रीकृष्ण कथाचार धामज्योतिर्लिंग52 शक्तिपीठशास्त्र पुस्तकालयग्रंथ संसारइतिहासमंत्रमंत्र एवं स्तुतियाँपाठ — सुंदरकांड आदिश्रवणपूजा विधिपर्व-त्योहार16 संस्कारपरंपराअखाड़े व सम्प्रदायपवित्र नदियाँपवित्र वृक्षगोत्र-प्रवरसमाधान (100 प्रश्नोत्तर)सनातन संवाद🔍 खोजेंनित्य कर्मचार वेदवेद18 महापुराण + 18 उपपुराणपुराणउपनिषद24 अवतारऋषि-मुनि ज्ञानकोशदेव-देवी ज्ञानकोशश्रीराम कथाश्रीकृष्ण कथाचार धामज्योतिर्लिंग52 शक्तिपीठशास्त्र पुस्तकालयग्रंथ संसारइतिहासमंत्रमंत्र एवं स्तुतियाँपाठ — सुंदरकांड आदिश्रवणपूजा विधिपर्व-त्योहार16 संस्कारपरंपराअखाड़े व सम्प्रदायपवित्र नदियाँपवित्र वृक्षगोत्र-प्रवरसमाधान (100 प्रश्नोत्तर)सनातन संवाद

देवी माहात्म्य

देवी माहात्म्यम् (दुर्गा सप्तशती)

देवी शक्ति की परम महिमा और दानव विनाश का पवित्र ग्रंथ

पढ़ने का समय

8 मिनट

श्लोक/आयत

700

अध्याय/भाग

13

काल अनुमान

ईसा सन् 600-800

लेखक

महर्षि मार्कण्डेय (द्रष्टा: ऋषि मैत्रेय)

स्रोत

मार्कण्डेय पुराण का भाग

परिचय

देवी माहात्म्य या दुर्गा सप्तशती देवी शक्ति की परम महिमा का पवित्र ग्रंथ है। यह मार्कण्डेय पुराण का एक महत्वपूर्ण भाग है लेकिन अपने आप में पूर्ण और स्वतंत्र ग्रंथ माना जाता है। इसमें 700 श्लोक हैं जो 13 अध्यायों में विभाजित हैं। यह ग्रंथ देवी के तीन प्रमुख अवतारों की महिमा और दानवों के विनाश की कथाएं बताता है। नवरात्रि के दौरान इस ग्रंथ का पाठ सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
पुराणदेवीदुर्गाशक्तिसंस्कृतनवरात्रि

📖 परिचय — देवी-माहात्म्य

देवी-माहात्म्य, जिसे दुर्गा सप्तशती भी कहा जाता है, मार्कण्डेय पुराण का एक अंश है, जो अपनी लोकप्रियता और सुसंगठित संरचना के कारण आज प्रायः स्वतंत्र ग्रंथ के रूप में पढ़ा-पूजा जाता है। यह देवी-शक्ति की उपासना करने वाली शाक्त परंपरा का सर्वाधिक प्रतिष्ठित पाठ माना जाता है, विशेषतः नवरात्रि के नौ दिनों में इसका पूर्ण पाठ करने की परंपरा है। इसकी संरचना तीन चरित्रों (मधु-कैटभ वध, महिषासुर वध, शुम्भ-निशुम्भ वध) में विभाजित है, जो देवी की शक्ति को क्रमशः बढ़ते हुए रूपों में प्रस्तुत करती है। देवी-माहात्म्य का दार्शनिक महत्व केवल कथा-रस तक सीमित नहीं — यह शक्ति (देवी) को सृष्टि की मूल ऊर्जा और सभी देवताओं की शक्ति के स्रोत के रूप में प्रस्तुत करता है, जो शाक्त दर्शन की केंद्रीय मान्यता है। यह मार्कण्डेय पुराण से जुड़ा होने के बावजूद अपने स्वतंत्र काव्य-सौंदर्य, संगठित संरचना और भक्ति-प्रभाव के कारण भारतीय धार्मिक साहित्य में विशिष्ट स्थान रखता है।

🔑 मुख्य बातें

  • देवी-माहात्म्य (दुर्गा सप्तशती) मार्कण्डेय पुराण का अंश है, जो शाक्त परंपरा का सर्वाधिक प्रतिष्ठित पाठ माना जाता है।
  • इसकी संरचना तीन चरित्रों — मधु-कैटभ वध, महिषासुर वध, शुम्भ-निशुम्भ वध — में विभाजित है।
  • नवरात्रि के नौ दिनों में इसके पूर्ण पाठ की परंपरा है।
  • यह देवी (शक्ति) को सृष्टि की मूल ऊर्जा और समस्त देवताओं की शक्ति के स्रोत के रूप में प्रस्तुत करता है।
  • अपने स्वतंत्र काव्य-सौंदर्य और संगठित संरचना के कारण यह मूल पुराण से जुड़े होकर भी विशिष्ट पहचान रखता है।

📚 देवी-माहात्म्य जिस मार्कण्डेय पुराण का अंश है, उसका पूर्ण अध्ययन-पृष्ठ और मूल ग्रंथ-खंड देखें।

विस्तार से पढ़ें →

❓ प्रश्नोत्तर

देवी-माहात्म्य किस पुराण का हिस्सा है?

यह मार्कण्डेय पुराण का एक अंश है, जो अपनी लोकप्रियता के कारण आज प्रायः स्वतंत्र ग्रंथ के रूप में भी पढ़ा जाता है।

देवी-माहात्म्य के तीन चरित्र कौन-से हैं?

मधु-कैटभ वध, महिषासुर वध और शुम्भ-निशुम्भ वध — ये तीन चरित्र (भाग) देवी की शक्ति को क्रमशः बढ़ते हुए रूपों में प्रस्तुत करते हैं।

दुर्गा सप्तशती और देवी-माहात्म्य एक ही ग्रंथ हैं क्या?

हाँ, "दुर्गा सप्तशती" इसी ग्रंथ का दूसरा प्रचलित नाम है।

🔗 संबंधित पृष्ठ